27 महीने बाद खुला 4 हत्‍याओं का राज

27 महीने बाद खुला 4 हत्‍याओं का राज
गाजियाबाद की मसूरी गंग नहर से एक लडकी की लाश
मिली थी, धौलाना पुलिस उसे ऑनर किलिंग मानकर लडकी के परिजनों को तलाश करती रही। लेकिन दो साल बाद एक कातिल दिल्‍ली पुलिस की अपराध शाखा के हत्‍थे चढ़ा तो एक ही परिवार के चार सदस्‍यों की हत्‍या की खौफनाक साजिश का खुलासा हुआ, आप इस कहानी काे जरूर पढ़े ताकि आप पहचान सकें आस्‍तीन में पल रहे सांप को।

एस के वर्मा 

वेदप्रकाश के पास सबकुछ था। दौलत, शोहरत और परिवार लेकिन अगर नहीं था तो बस एक ऐसा दिल जो किसी की मदद कर सके। हांलाकि वेद प्रकाश ने जो कुछ कमाया था अपनी मेहनत और दिमाग से कमाया था इसलिए वह एक-एक पाई मुट्ठी भींचकर खर्च करता था। किसी को अगर एक पैसा भी वह मदद के लिए देता तो उसे सूद समेत वापस ले लेता था। यूं कहीं तो गलत नहीं होगा कि वेदप्रकाश ऐसा इंसान तो जो चमडी तो दे सकता था लेकिन दमडी नहीं। मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले वेदप्रकाश किरोडीवाल 47 जाति ये कुम्हार था। स्वर्गीय रूपचंद सालों पहले अपनी पत्नी व तीन बच्चों के साथ दिल्ली के वजीराबाद में आकर बस गए थे। उनके तीन बच्चे थे। दो बेटे और एक बेटी। वेदप्रकाश इनमें सबसे छोटा था। तीनों बच्चों के घर बसने के बाद रूपचंद और उनकी पत्नी स्वर्ग सिधार गए।
माता पिता की मौत के बाद कुनबे के नाम पर वेदप्रकाश की एक बडी बहन थी और एक बड़ा भाई था रामकिशन। बहन की शादी हो चुकी थी उसका अपना परिवार था। वेदप्रकाश के घर में बहन का आना जाना कम ही था। बड़े भाई रामकिशन से भी वेदप्रकाश उतना ही वास्ता रखते थे जितनी जरूरत होती। वेदप्रकाश वजीराबाद की गली नंबर 9 में रहते थे। हालांकि वेदप्रकाश के बड़े भाई रामकिशन भी वजीराबाद में ही रहते थे लेकिन उनकी हैसियत उतनी बडी नहीं थी जितनी वेदप्रकाश की थी। उनके परिवार में पत्नी साधना (44) के अलावा एक बेटी थी नैना (23) और इकलौता बेटा था शुभम (20)। शुभम मैनेजमेंट की पढाई कर रहा था जबकि बेटी नैना एक स्कूल में टीचर थी।

आराेपी अभिषेक पाल

वेदप्रकाश का वजीराबाद की गली नंबर 9 में तीन सौ गज जमीन पर तीन मंजिला आलीशान मकान था। इस मकान के पहले फ़लोर पर वे अपने परिवार के साथ रहते थे जबकि ग्राउंड फ्लोर से लेकर दूसरे फलोर पर उन्होंने 4 फ्लैट बनाए हुए थे जिसे उन्होंने किराए पर दिया हुआ था इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकाने उन्होंने किराए पर दी हुई थी। जिसमें एक दुकान जनरल मर्चेन्ट की थी दुसरी में मैडीकल स्टोर चलता था। इन सबसे वेदप्रकाश को मोटा किराया आता था जिससे उन्हें अच्छी खासी आमदनी होती थी। इसके अलावा उनका सूद पर पैसा उधार देने का काम था। इससे भी उन्हें मोटी आमदनी होती थी। सूदखोरी के कारण ही पैसे के प्रति वेदप्रकाश की नीयत बेहद कंजूस प्रवृत्ति की हो गई थी और वह पैसे के लिए जान छिडकते थे। वेद प्रकाश की लालची और कंजूस प्रवृत्ति के कारण उसे जानने वाले लोग उसे डैनी कहकर बुलाते थे। इलाके के लोग कहते थे कि एक बार अगर किसी व्यक्ति ने डैनी से ब्याज पर रकम उधार ले ली तो फिर उसका पीछा डैनी के कर्ज से तभी छूट सकता है जब उस शख्स की मौत हो जाए। जीते जी डैनी के मूल धन और ब्याज से किसी को मुक्ति नहीं मिल सकती । वेद प्रकाश की कंजूस प्रवत्ति  का पता इसी बात से चलता है की उसके बड़े भाई राम किशन जो वजीराबाद में रहते थे और उनकी आर्थिक स्थिति वेद प्रकाश की तरह बहुत अच्छी नहीं थी उसे भी वेद प्रकाश ने कभी कोई मदद नहीं की। रामकिशन के तीन बेटे हैं उन्हीं में सबसे बड़ा बेटा सोनू कुछ साल पहले वेद प्रकाश की दुकान पर सेल्समैन के रूप में काम करता था । वेद प्रकाश ने सोनू को कभी भी एक कर्मचारी से ज्यादा महत्व नहीं दिया । वेद प्रकाश उसके साथ भी ऐसा ही व्यवहार करता था जैसा दूसरे स्टाफ के साथ । इसीलिए बाद में सोनू ने वेद प्रकाश की मजनू का टीला इलाके में मोनेस्टी की दुकान से काम छोड़कर वजीराबाद में अपनी रेडीमेड कपड़ो की दुकान खोल ली थी।

वेद प्रकाश के परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था । छोटा सा सुखी परिवार था पैसे या जायदाद की कोई कमी नहीं थी । जीवन से वह पूरी तरह संतुष्ट था। लेकिन अचानक 16 जुलाई 2016 की शाम को वेद प्रकाश अपनी पत्नी और दोनों बच्चों के साथ अचानक लापता हो जाते हैं । उनके घर पर ताला लटका था। न तो आस पड़ोस के लोगों ने और ना ही किसी किराएदार ने वेद प्रकाश व उनके परिवार को देखा। उनकी सेंट्रो कार भी उसी दिन से कहीं दिखाई नही दे रही थी। पहले तो लोगों को लगा कि शायद वेद प्रकाश अपनी किसी रिश्तेदारी में परिवार के साथ कहीं गए होंगे । लेकिन जब इसी तरह एक-दो दिन गुजर गए और परिवार वापस नहीं आया तो उनके किराएदार व अन्य लोगों ने वेदप्रकाश व उनके परिवार के सदस्यो को फोन पर संपर्क करना शुरू किया। लेकिन इस प्रयास के बाद लोगों की हैरानी और बढ़ गई क्योंकि परिवार के किसी भी सदस्य से फोन पर संपर्क नहीं हो रहा था। सबके मोबाइल स्विच ऑफ थे । जब लोगों को ज्यादा चिंता हुई तो कुछ लोगों ने वजीराबाद में ही रहने वाले उनके भाई रामकिशन से संपर्क किया और उन्हें बताया की वेद प्रकाश और उनका परिवार अचानक कहीं लापता हो गया है। हालांकि राम किशन का अपने भाई वेद प्रकाश के घर आना जाना नहीं था और संबंध भी बहुत अच्छे नहीं थे लेकिन आखिरकार वेद उनका छोटा भाई था इसलिए उन्हें भी चिंता हुई। वे उसके घर पहुंचे जहां वाकई ताला लटका था उन्होंने भी वेद प्रकाश व परिवार के दूसरे सदस्यों से फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की । लेकिन उन्हें भी असफलता ही हाथ लगी इसके बाद चिंतित रामकिशन कुटुंब के अन्य लोगों से फोन पर बात करके जानकारी हासिल करने लगे कि उन्हें वेद प्रकाश या उनके परिवार के बारे में कोई खबर है । लेकिन कहीं से भी आशा जनक खबर नहीं मिली रामकिशन समझ नहीं पा रहे थे कि इस अवस्था में क्या किया जाए। हालांकि 1-2 लोगों ने उन्हें राय दी की पुलिस में वेदप्रकाश और उनके परिवार की गुमशुदगी का मामला दर्ज करवा दिया जाए। राम किशन अभी इस राय पर विचार विमर्श कर ही रहे थे कि 19 जुलाई 2016 की सुबह उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद के धौलाना थाने की पुलिस वेद प्रकाश के मकान पर पहुंची। पुलिस के पहुंचते ही उनके मकान में रहने वाले किराएदार और आस पड़ोस के लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। किसी ने रामकिशन को भी इस बात की सूचना दे दी तो वह भी वेद प्रकाश के मकान पर पहुंच गए। लेकिन वहां पहुंचने के बाद रामकिशन को पुलिस से जो जानकारी मिली उसे सुनकर वे सन्न रह गए । क्योंकि पुलिस ने बताया था कि उन्हें धौलाना थाना क्षेत्र में बहने वाली मसूरी गंग नहर में 17 अक्टूबर को एक लड़की का शव मिला था। लड़की का शव नहर के किनारे ही पड़ा था जिसकी हत्या किसी ने तार से गला दबाकर की थी । लड़की के शव से चंद कदम की दूरी पर ही नहर किनारे रेत में फंसी सफेद रंग की एक सेंट्रो कार खड़ी थी जिस में पड़े दस्तावेजों से पता चला की यह कार वेदप्रकाश किरोड़ीवाल नाम के किसी व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत थी और उस पर वजीराबाद के इस घर का पता अंकित था । धौलाना पुलिस ने रामकिशन को जिस कार के बारे में बताया था वह कार वेद प्रकाश की ही थी। रामकिशन ने धौलाना पुलिस को बता दिया कि 16 जुलाई की शाम से उनके भाई वेदप्रकाश और उनके परिवार लापता है । धौलाना पुलिस वेद प्रकाश के भाई राम किशन और उनके एक दो किरायदारों को लेकर हापुड़ के जिला अस्पताल पहुंची । जहां नहर किनारे बरामद हुए लड़की के शव को पोस्टमार्टम के बाद सुरक्षित रखवाया गया था। रामकिशन व अन्य लोगों ने देखते ही पहचान लिया कि वह सब वेद प्रकाश की बेटी नैना का शव था। शव की पहचान होने के बाद धौलाना पुलिस ने नैना के शव को उसके ताऊ राम किशन के सुपुर्द कर दिया । रामकिशन ने अपने परिवार वालों और अन्य लोगों के साथ मिलकर हापुड़ के ही श्मशान गृह में  नैना के शव का अंतिम संस्कार कर दिया। तब तक धौलाना थाने की पुलिस ने अपराध संख्या 269/16 पर भारतीय दंड विधान की धारा 302 व 201 में हत्या व सबूत नष्ट करने का मामला दर्ज कर लिया। इस केस की जांच का जिम्मा धौलाना थाने के सब इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा को सौंपा गया । पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नैना की हत्या का कारण किसी तार से उसकी गर्दन दबाना बताया गया था जिससे यह तो साफ था कि उसकी हत्या की गई है ।

रामकिशन से पूछताछ और वेद प्रकाश तथा परिवार के दूसरी सदस्य के लापता होने से साफ लग रहा था कहीं ना कहीं नैना की हत्या में उसके ही परिवार के लोगों का हाथ है और अपने इसी अपराध से बचने के लिए परिवार लापता हो गया है। क्योंकि रामकिशन का अपने भाई के घर बहुत ज्यादा आना जाना नहीं था इसलिए वे वेद प्रकाश या परिवार की दूसरे सदस्यों के बारे में कोई बहुत ज्यादा जानकारी नहीं दे पाए । अलबत्ता उन्होंने पुलिस को यह सहयोग देने का वायदा जरूर कर लिया कि जैसे ही उनके भाई वेदप्रकाश या परिवार का कोई दूसरा सदस्य वजीराबाद में अपने घर लौटेगा या उनसे कोई संपर्क करेगा तो इस बात की इतला वे धौलाना पुलिस को जरूर देंगे । दरअसल जांच अधिकारी नरेंद्र शर्मा को लग रहा था नैना की हत्या ऑनर किलिंग का मामला है। हो सकता है नैना का किसी युवक से प्रेम प्रसंग हो या किसी तरह के गलत संबंध हो जिसे परिवार पसंद नहीं करता हो और संभवत परिवार ने इसी कारण उसकी हत्या कर शव को मसूरी की गंग नहर में लाकर फेंक दिया हो। नैना हत्याकांड की जांच करने वाले सब इंस्पेक्टर नरेंद्र शर्मा का कुछ समय बाद तबादला हो गया और इसके बाद जांच की जिम्मेदारी उनके स्थान पर आए नई पुलिस अधिकारी को सौंपी गई । उन्होंने भी इसी दिशा में जांच को आगे बढ़ा दिया । लेकिन हैरत की बात थी कि महीनों बीत जाने के बावजूद भी वेद प्रकाश उनके बेटे और पत्नी का कोई पता नहीं चला । इस केस की जांच करने वाले दूसरे अधिकारी का भी तबादला हो गया और उनके बाद भी एक नए अधिकारी के हाथों में जांच की फाइल पहुंची। लेकिन वेद प्रकाश के परिवार के लापता होने के कारण धौलाना पुलिस ऑनर किलिंग इस केस को सुलझाने में असफल रही।नैना की हत्या के संदिग्ध आरोपियों के रूप में  उसके पिता मां और भाई को फरार घोषित करके धौलाना पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट अदालत में दाखिल कर दी। वक्त धीरे धीरे यूं ही गुजरने लगा वेद प्रकाश और उनके परिवार की अनुपस्थिति में उनकी संपत्ति की देखभाल उनके भाई रामकिशन और उनका परिवार ही करने लगा । 2 साल से अधिक का वक्त बीत गया मगर वेद प्रकाश उनकी पत्नी और बेटे का कोई पता नहीं चला।

एक समाराेह में मृतक परिवार

27 अक्टूबर 2018 को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की नारकोटिक्स यूनिट के एसीपी आदित्य गौतम की अगुवाई में इंस्पेक्टर सुनील जैन सब इंस्पेक्टर राकेश और विमल, एएसआई कंवल सिंह, महेश, राजेंद्र, संतराज, श्री ओम, हनुमान, राजेश हेड कांस्टेबल योगेश, रामदास, गंगाधर, राम कुमार कांस्टेबल ओम प्रकाश, कुलदीप और सुनील कुमार की टीम ने एक गोपनीय सूचना के आधार पर आउटर रिंग रोड पर संजय अखाड़ा के पास वजीराबाद गांव में रहने वाले अभिषेक पाल उर्फ मिंटू (26) को गिरफ्तार किया । उसकी तलाशी में पॉइंट 32 बोर का एक पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद हुए। अभिषेक पाल से जब इस्पेक्टर सुनील जैन की टीम ने गहन पूछताछ की तो अचानक ऐसे सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ जिसे सुनकर क्राइम ब्रांच की टीम का हर सदस्य हैरान रह गया। पता चला कि वेद प्रकाश किरोड़ीवाल की जिस बेटी नैना की हत्या को धौलाना पुलिस ऑनर किलिंग का मामला मानकर उसके ही माता – पिता और भाई की तलाश कर रही थी असल में उसकी हत्या अभिषेक पाल और उसके एक साथी मन्नू बावला ने की थी।

इतना ही नहीं अभिषेक पाल से पूछताछ में यह भी पता चला कि उन्होंने नैना की ही हत्या नहीं की थी बल्कि उसके पिता वेद प्रकाश, मां साधना और भाई शुभम की भी हत्या करके उनके शवों को मसूरी गंग नहर में फेंक दिया था। तीनों के शव तो गंग नहर में बहकर न जाने कहां पहुंच गए।  लेकिन नैना के शव को वे नहर के बीच में नहीं फेंक पाए थे इसलिए उसका शव किनारे पर ही आ लगा था । जो धौलाना थाना पुलिस को बरामद हो गया था। इसी आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया । चूंकि पूरा परिवार गायब था इसलिए इसे ऑनर किलिंग का मामला मान लिया गया । अभिषेक पाल से पूछताछ में पता चला की मन्नू बावला की सितंबर 2018 में एक दुर्घटना में मौत हो चुकी है। इस चौहरे हत्याकांड में अभिषेक पाल का एक दोस्त रितेश कटियार भी शामिल था जिसने हत्याकांड के 6 महीने बाद ही पारिवारिक कारणों से जहर खाकर खुदकुशी कर ली थी।

अपराध शाखा के नारकोटिक्स दस्ते की टीम ने अभिषेक पाल को कैसे पकड़ा और इस चोहरे हत्याकांड का खुलासा कैसे हुआ इसकी भी एक दिलचस्प कहानी है। दरअसल नारकोटिक्स दस्ते की टीम में काम करने वाले कर्मियों को ऐसे ठिकानों पर नजर रखनी पड़ती है जहां नशा पानी करने वाले शौकीन एकत्रित होते हैं।

वेदप्रकाश का वह मकान जिसके लिए रची गयी साजिश

दिल्ली के मजनू का टीला का इलाका ऐसी ही जगह है। जहां दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से लोग तरह तरह का नशा करने के लिए आते हैं । दरअसल मजनू का टीला बोद्ध धर्म को मानने वाले तिब्बतियों की ऐसी बस्ती है जहां घर घर में ताड़ी पिलाने का धंधा चलता है । ताड़ी तिब्बतियों का ऐसा नशीला सेवन है जिसे चावल को सड़ा कर घर – घर में तैयार किया जाता है। तिब्बती परिवार की खूबसूरत महिलाएं और लड़कियां अपने घरों में ही छोटे-छोटे रेस्टोरेंट खोलकर ताड़ी पीने के शौकीनों को न सिर्फ ताड़ी बल्कि साथ मे खाने पीने के अन्य सामान भी अपने हाथों से सर्व करती हैं। ताड़ी एक ऐसा नशा है जिस पर किसी तरह का कानूनी प्रतिबंध नहीं है। लोग मजनू का टीला बस्ती में तिब्बतियों के घर में जाकर ताड़ी क्यों पीते हैं इसकी भी दिलचस्प वजह है। दरअसल किसी बार या होटल में दारू पीना काफी महंगा पड़ता है। और खुले स्थान पर शराब पीने से पुलिस की पकड़ धकड़ का डर बना रहता है। इसलिए लोग अपनी शराब लेकर तिब्बतियों के ताड़ी बार में पहुंचते हैं और वहां नाम के लिए ताड़ी और दूसरे सामान खरीदकर खुलेआम शराब का सेवन करते हैं। ऐसे में ताड़ी बार चलाने वाले तिब्बती लोगों को भी कोई एतराज नहीं होता क्योंकि इस वजह से उनका काम धंधा खूब चलता है और गुजर-बसर आराम से हो जाती है। ताड़ी बार में जाने की 1 वजह यह भी होती है कि वहां उन्हें खूबसूरत तिब्बती महिलाओं और युवतियों के सानिध्य और उनसे बातचीत का भी मौका मिल जाता है । मजनू का टीला ताड़ी बार में ज्यादातर अपराधी और आवारा किस्म के लोगों का ही आना जाना रहता है इसलिए पुलिस अपने मुखबिरों की मदद से इस इलाके के ताड़ी बार पर हमेशा नजर रखती है। कई बार तो ताड़ी बार चलाने वाले तिब्बती भी इस काम मे पुलिस की मदद करते रहते हैं। मजनू का टीला इलाका वजीराबाद इलाके से ज्यादा दूर नहीं है। इसलिए इस गांव के नौजवान और आवारा किस्म के लड़के भी ज्यादातर मजनू का टीला के ताड़ी बारों में बैठकर नशा पानी करते हैं। कुछ लोग इस इलाके में चोरी छुपे अफीम, चरस ओर स्मैक की बिक्री भी करते हैं।

अपराध शाखा की नारकोटिक्स यूनिट में तैनात एएसआई कँवल सिंह का भी एक खास मुखबिर अक्सर मजनू का टीला इलाके के ताड़ी बार में जाकर वहां सुरागरशी करता रहता था। कई बार उसे वहां से नशे के सौदागरों की जानकारियां भी मिली थी । लेकिन 5 अक्टूबर 2018 को मजनू का टीला के एक ताडी बार में एएसआई कंनल सिंह का एक खबरी पवन ( काल्पनिक नाम ) वहां बैठकर कुछ लोगों के साथ नशा पानी कर रहा था। उसी वक्त उनमें से किसी एक ने बातों ही बातों में वजीराबाद में रहने वाले मन्नू बावला का जिक्र कर दिया । मुखबिर पवन के साथी बातचीत कर रहे थे कि मनु बावला जितना दिलेर और जिंदादिल इंसान था उसकी मौत उतनी ही दर्दनाक हुई। कंवल सिंह का मुखबिर पवन भी जानता था कि मल्लू बावला कौन है। क्योंकि कई बार उसकी किसी न किसी ताड़ी बार में मुलाकात होती रहती थी। नशे का शौकीन मन्नू बावला अपने जान-पहचान वालों में एक झगड़ालू युवक के रूप में चर्चित था।

इंसपेक्टर सुनील जैन

लेकिन चर्चा के दौरान कंवल सिंह के मुखबिर पवन के कान उस वक्त खड़े हुए जब वे आपस में चर्चा करने लगे की बन्नू बावला ने वेद प्रकाश की पूरी फैमिली का काम तमाम कर दिया मामला भी खुल गया लेकिन मरते वक्त तक बंदा पकड़ा नहीं गया और ना ही आज तक वेद प्रकाश के परिवार की मौत का खुलासा हो पाया । बातचीत के दौरान पवन को यह भी पता चला कि मन्नू बावला ने वजीराबाद में रहने वाले अपने दोस्त अभिषेक पाल उर्फ मिंटू के कहने पर वेद प्रकाश की फैमिली का काम तमाम किया था  लेकिन इतना बड़ा काम करने के बाद भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ। ना तो अभिषेक पाल को मोटा माल मिला न हीं मन्नू बावला को कोई रकम नहीं मिली। जानकारी ऐसी थी कि मुखबिर नशे पानी में मिली इस खबर को पचा नहीं पाया और उसने एएसआई कंवल सिंह से इस बात का जिक्र किया । जानकारी वाकई सनसनीखेज थी इसलिए कँवल सिंह ने इसे नजरअंदाज नहीं किया बल्कि इस बारे में अपनी यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर सुनील जैन को बताया तो उन्होंने कंवल सिंह को निर्देश दिया कि वह इस मामले की तह तक जाएं और अभिषेक पाल के बारे में जानकारी हासिल करें उस दिन के बाद एएसआई कंवल सिंह अपने मुखबिर पवन के साथ वेद प्रकाश और उसके परिवार के लापता होने और मन्नू बावला तथा उसके दोस्त अभिषेक पाल के बारे में छोटी से छोटी जानकारी एकत्र करने लगे। कई दिन की मशक्कत के बाद एएसआई कमल सिंह को आखिर कुछ जानकारी हासिल हो गई और उन्हें पता चला की मन्नू बावला जो कुछ ही दिन पहले अपने तीन दोस्तों के साथ दुर्घटना में मारा गया था वह बेरोजगार लेकिन सिरफिरा व्यक्ति था। छोटी-छोटी बातों पर वह किसी से भी झगड़ा कर लेता था। वह शराब और नशे का इतना शौकीन था कि अगर कोई व्यक्ति उसे नशे पानी की दावत दे दें तो वह उसके लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता था। मन्नू बावला (22) वजीराबाद गांव का ही रहने वाला था अभी उसकी शादी नहीं हुई थी । ज्यादा पढ़ा-पढ़ा लिखा भी नहीं था। उसी के गांव में अभिषेक पाल रहता था। मन्नू बावला की अभिषेक पाल से अच्छी पटती थी। दरअसल अभिषेक खुद तो शराब नहीं पीता था लेकिन यदा कदा वह मन्नू बावला को जरूर शराब पिला देता था। इसी कारण मन्नू बावला अभिषेक के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता था। एएसआई कंवल सिंह को इस बात की पुख्ता जानकारी मिल गई कि अभिषेक पाल ने वेद प्रकाश किरोड़ीवाल से कुछ पैसा उधार लिया था। लेकिन वापस नहीं लौट पाने के कारण यह रकम ब्याज समेत इतनी ज्यादा हो चुकी थी  कि उसे लौटाना उसके लिए नामुमकिन हो गया। इसीलिए उसने वेदप्रकाश और उसके परिवार को गायब करके उनकी हत्या कर दी। वेद प्रकाश उनकी पत्नी और बेटे का तो कोई सुराग नहीं लगा लेकिन वेद प्रकाश की बेटी नैना का शव गाजियाबाद की धौलाना के पास गंग नहर से बरामद हुआ था। हालांकि धौलाना पुलिस भी मामले की तह तक नहीं पहुंच सकी थी लेकिन जब मन्नू बावला की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई तो उसके साथ नशा पानी करने वाले संगी साथी इस बात पर जरूर चर्चा करने लगे क्योंकि मन्नू बावला जब जिंदा था तो वह अकसर शराब के नशे में अपने संगी साथियों के साथ अपनी बहादुरी की डींगे मारते हुए इस बात का जिक्र कर जाता था मन्नू बावला को जानने वाले सभी लोग उसके सिर्रफिरे पन से डरते थे। इसलिए सारी बात जानने के बावजूद उन्होंने उसके जीते जी कभी इस बात का जिक्र नहीं किया लेकिन जब मन्नू बावला की मौत हो गई तो वह भी चटकारे लेकर इस बात की चर्चा करने लगे और इसी तरह बात फूटते फूटते पहले पुलिस के मुखबिर उसके बाद एएसआई कंवल सिंह को पता चल गई। कंवल सिंह ने जब सारी जानकारी जुटा ली तो उन्होंने अपने इंस्पेक्टर सुनील जैन को सारी जानकारी दी । इंस्पेक्टर सुनील जैन ने अपने एसीपी आदित्य गौतम से जब इस बारे में बात की तो उन्होंने सुनील जैन से कहा ऐसे जघन्य हत्याकांड को अंजाम देने वाला एक अपराधी खुलेआम घूम रहा है इसलिए हमें हर हाल में उसे पकड़कर सजा दिलानी चाहिए । उच्चाधिकारियों का निर्देश मिलते ही इंस्पेक्टर सुनील जैन ने अपने स्टाफ की एक टीम गठित की और इस बात की जानकारी लेने के काम पर लगा दिया की अभिषेक पाल कि क्या गतिविधियां है और वह कहां मिल सकता है । 27 अक्टूबर को एएसआई कवलजीत सिंह के मुखबिर ने उन्हें सूचना दी की अभिषेकपाल आज शाम संजय अखाड़ा के पास रिंग रोड पर किसी से मिलने के लिए जाएगा और इसी के बाद क्राइम ब्रांच की नारकोटिक्स यूनिट के दस्ते ने अभिषेक पाल को धर दबोचा। उसकी तलाशी में एक पिस्तौल और दो कारतूस बरामद हुए। सुनील जैन ने क्राइम ब्रांच थाने में अभिषेक पाल के खिलाफ अपराध संख्या 272/18 पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत करा दिया। उससे वेद प्रकाश किरोड़ीवाल तथा उनके परिजनों की हत्या के बारे में विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी। अभिषेक पाल से पूछताछ के बाद चौहरे हत्याकांड की हैरतअंगेज कहानी सामने आई।

हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि वेद प्रकाश ब्याज पर लोगों को पैसा देने का काम करता था। कुछ साल पहले मजनू का टीला इलाके की मोनेस्ट्री में उसकी एक रेडीमेड कपड़ों की दुकान थी। जिसमें यूपी के कन्नौज के रहने वाले रितेश कटियार ( 28) और वेद प्रकाश के बड़े भाई रामकिशन का बड़ा बेटा सोनू (36) हेल्पर व  सेल्समैन के रूप में काम करते थे।

आराेपी अभिषेक पाल पुलिस गिरफ्त में

वेद प्रकाश कंजूस प्रवृत्ति का व्यक्ति था । एक एक पैसे पर जान छिड़कता था । उसके सामने पैसे के आगे रिश्ते नाते सब बेमानी थे। एक दिन ऐसा हुआ कि वेद प्रकाश के भतीजे सोनू ने गल्ले से कुछ पैसे निकाल लिए और रितेश के साथ उस शाम शराब पीने चला गया। संयोग से यह बात वेद प्रकाश को पता चल गई। जिसके बाद वेद प्रकाश ने रितेश के सामने ही अपने भतीजे सोनू की पिटाई कर दी। एक दूसरे कर्मचारी के सामने अपने चाचा का यह व्यवहार बेहद नागवार गुजरा । लिहाजा उसने उसी दिन वहां से काम छोड़ दिया। सोनू के पिता  रामकिशन को भी अपने भाई वेदप्रकाश का यह बर्ताव अच्छा नहीं लगा । लिहाजा उन्होंने अपने बेटे को वजीराबाद मे ही कर्ज लेकर रेडीमेड कपड़ों की एक दुकान खुलवा दी। संयोग से ऐसा हुआ कि इस घटना के कुछ दिन बाद ही वेद प्रकाश भी बीमार हो गए। जिसके कारण उनका दुकान पर जाना बंद हो गया । कुछ दिन तक तो दुकान बंद रही लेकिन बाद में रितेश कटियार ने एक दिन उनसे पूछा – सेठ जी अगर आपको दुकान नहीं चलानी है तो इसे बेच दीजिए वरना इस तरह तो नुकसान हो जाएगा।

तब वेद प्रकाश ने अपनी दुकान रितेश के अनुरोध पर उसको ही किराए पर दे दी। दुकान में रखे सारे सामान को भी उसने 3 लाख रुपये में रितेश को दे दिया । चूंकि रितेश के पास नकद पैसा तो था नहीं लिहाजा उसने वेद प्रकाश से 3 लाख की इस रकम की उधारी कर ली। तय हुआ कि दुकान के किराए के अलावा रितेश हर महीने ब्याज समेत एक निश्चित रकम वेदप्रकाश को अदा करता रहेगा।  ब्याज पर ली गई थी इस रकम की स्टांप पेपर पर लिखत पढ़त भी करा ली गई। कुछ दिन तक तो रितेश का काम धंधा ठीक-ठाक चला । लेकिन 2016 में रितेश का कारोबार एकाएक ठप हो गया। इसके बाद रितेश वेद प्रकाश को जो कर्ज चुकाने के लिए मासिक किस्त देता था वह भी धीरे-धीरे बंद हो गई । जिससे रितेश के ऊपर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता चला गया। चुकी रितेश दिल्ली में अकेला रहता था इसलिए उसे शराब और अय्याशी करने का भी शौक था । जो थोड़ी बहुत कमाई होती थी उसे वह अपने इन शौक को पूरा करने में लुटा देता था।

वेद प्रकाश के भाई राम किशन के बेटे सोनू ने वजीराबाद गांव में जहां रेडीमेड कपड़ों की दुकान की थी उसके बगल में है अभिषेक पाल उर्फ मिंटू रहता था इसीलिए अक्सर सोनू की दुकान पर आकर अपना वक्त गुजारा करता था। अभिषेक पाल मूल रूप से वजीराबाद गांव का ही रहने वाला था और गडरिया बिरादरी से ताल्लुक रखता था । दो  भाई व एक बहन में वह सबसे बड़ा था । उसके पिता का प्रॉपर्टी का कारोबार था लेकिन अभिषेक पाल घर में बड़ा होने के बावजूद कुछ नहीं करता था सोनू की दुकान पर उठते बैठते अभिषेक और सोनू की दोस्ती घनिष्ठता में बदल गई। इधर सोनू अक्सर मिलने जुलने के लिए रितेश से मजनू का टीला में उसकी दुकान पर जाता था । वह अक्सर अभिषेक पाल को भी साथ ले जाता अभिषेक को तो शराब पीने का शौक नहीं था लेकिन जब सोनू, रितेश से मिलने जाता तो वहां उनकी दारू बाजी की बैठक जरूर होती। इसी तरह के आवागमन से अभिषेक पाल की रितेश के साथ भी घनिष्ठता हो गई । अब वह अक्सर अपना वक्त गुजारने के लिए सोनू के बिना भी मोनेस्ट्री में रितेश की दुकान पर आ जाता था। इस दौरान रितेश ने वेद प्रकाश के मकान में ही फ्लैट किराए पर ले लिया। वेद प्रकाश ने भी उसे इसलिए मकान किराए पर दे दिया कि अगर वह उसके मकान में रहेगा तो उस का कर्ज लेकर भाग नहीं पाएगा।
इधर अगस्त- 2015 में रितेश ने वेद प्रकाश से जो दुकान के माल के रूप में जो कर्ज लिया था उसे चुका नहीं पाने के कारण यह कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा था और वेद प्रकाश का तकाजा भी बढ़ रहा था । इस कर्ज से मुक्ति के लिए एक दिन रितेश के दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न वह अभिषेक पाल को वेद प्रकाश से लोन दिलवा दे । इस रकम को वह अपने काम को बढ़ाने में इस्तेमाल कर लेगा और वेद प्रकाश के दोनों लोन की किस्त वह खुद चुका देगा। जब रितेश ने अभिषेक पाल से अपनी मदद करने के लिए यह बात कही तो अभिषेक सहज ही इसके लिए तैयार भी हो गया । जिसके बाद रितेश ने अभिषेक पाल की मुलाकात वेद प्रकाश से करवाई और अपनी गारंटी पर उसे 4 लाख का लोन दिलवा दिया। वेद प्रकाश अभिषेक पाल और उसके पूरे परिवार को जानता ही था इसलिए उसने इसकी गारंटी पर 10 फ़ीसदी ब्याज पर अभिषेक को 4 लाख उधार दे दिए । बदले में उससे 4 ब्लैंक चेक उसके आधार कार्ड की कॉपी और लोन की रसीद लिखकर एडवांस में साल का 40 हज़ार का ब्याज काट कर 3 लाख 60 हज़ार रुपये अभिषेक पाल को दे दिए। अभिषेक पाल ने यह रकम रितेश को इस्तेमाल करने के लिए दे दी । साथ ही वादा भी लिया कि वह वेद प्रकाश का लोन समय पर चुकता करता रहे। क्योंकि वह गांव का ही आदमी है और एक नंबर का काइयां आदमी है।  समय से पैसे नहीं दिए तो वह बवाल मचा देगा और बात उसके पिता तक पहुंच जाएगी। अभिषेक पाल के पिता बहुत सख्त मिजाज इंसान है। रितेश ने अभिषेक पाल के जरिए वेद प्रकाश से जो नया कर्ज लिया था उससे डेढ़ लाख रुपए में उसने सेकंड हैंड आई 20 गाड़ी खरीद ली। इस गाड़ी को रितेश ने इस्तेमाल करने के लिए अभिषेक पाल के सुपुर्द कर दिया। क्योंकि अगर वह यह बात जग जाहिर करता की गाड़ी उसने खरीदी है तो वेद प्रकाश अपना पुराना कर्ज न चुकाने पर इस गाड़ी को तुरंत अपने कब्जे में ले लेता। इसलिए जब उसे जरूरत होती तो वह अभिषेक पाल से गाड़ी चलाने के लिए मांग लेता। अन्यथा गाड़ी ज्यादातर अभिषेक पाल के पास ही रहती। लेकिन रितेश ने अभिषेक पाल के जरिए 4 लाख का जो कर्ज वेदप्रकाश से लिया था उसे गाड़ी खरीदने और कारोबार में लगाने के बाद भी उसका धंधा ज्यादा चल नहीं पाया और एक दो किस्तें देने के बाद दूसरे लोन की उधारी भी बढ़ने लगी। 1-2 महीने गुजरने के बाद वेद प्रकाश ने अभिषेक पाल से अपने कर्ज का तकादा शुरू कर दिया । शुरुआत में तो वेद प्रकाश ने सहज ढंग से तकादा किया। एक दो महीने इसी तरह गुजर गए तो एक दिन वेद प्रकाश ने अभिषेक पाल को धमकी दी कि या तो वह उस का कर्ज चुकाना शुरू कर दे , अन्यथा वह उसके पिता से इस बात की शिकायत कर देगा। वेद प्रकाश ने उस दिन अभिषेक पाल की आई 10 गाड़ी भी छीन कर अपने पास रख ली और कहां कि जब कर्ज उतार दो तो गाड़ी को ले जाना। हालांकि इस गाड़ी के चारों टायर थोड़े कमजोर थे और उसमें 1-2 डेट भी पड़े थे इसलिए  अभिषेक ने बहाना बनाया कि वह पहले इसके टायर बदलवा कर डेंट करा दे तब वह गाड़ी अपने पास रख ले लेकिन वेद प्रकाश तो काइयां था उसने एक नहीं सुनी और कहा जब टायर बदलवाने हो या डेंट कराना हो तो मुझे साथ ले चलना और यह काम करा लेना । लेकिन गाड़ी आज से मेरे ही पास रहेगी । लिहाजा अभिषेक को गाड़ी मजबूरी में वेद प्रकाश को देनी पड़ी। वेद प्रकाश ने साफ कह दिया गाड़ी रखने का मतलब यह मत समझना कि कर्ज नहीं चुकाना है । अगर अब ज्यादा देर की तो समझ लेना बात तुम्हारे बाप तक पहुंच जाएगी । बस यही वह कमजोर कड़ी थी जिससे अभिषेक पाल डरता था। क्योंकि अभिषेक जानता था कि उसके सख्त मिजाज पिता इस बात का पता चलते ही कि उसने वेद प्रकाश से कर्जा लिया है उसे घर से निकाल देंगे । लिहाजा उसने वेद प्रकाश को समझाया कि वह एक दो महीने इंतजार कर ले वह उसका सारा कर्जा एक साथ चुका देगा । इधर रितेश पर भी वेद प्रकाश कर्जा चुकाने के लिए दबाव बना रहा था। उधर अभिषेक पाल ने भी रितेश को ताने देने शुरू कर दिए कि उसके कारण वह वेद प्रकाश के जाल में फंस गया है । रितेश और अभिषेक पाल की जिंदगी वेद प्रकाश के कर्ज़ के तकाजो से मुश्किल में फंस गई थी। वे दोनों ऐसे ही परेशानी में बैठे थे कि एक दिन सोनू से उनकी मुलाकात हो गई और उन्होंने उसे अपने कर्ज़ों के बारे में बता कर पूछा वेद प्रकाश के कर्ज़ों से कैसे मुक्ति मिले। वेद प्रकाश का अपने और अपने परिवार के प्रति व्यवहार पता था साथ ही उसे यह बात भी याद थी कि किस तरह वेद प्रकाश ने चोरी के आरोप में उसकी पिटाई की थी और अपमानित होकर उसे नौकरी छोड़नी पड़ी थी। उसी के बाद से सोनू वेद प्रकाश और उसके परिवार से नफरत करता था । लिहाजा इसी खुंदक में उसने अभिषेक पाल व रितेश को सलाह दी कि ‘भाई वेद प्रकाश को तुम लोग जानते नहीं हो क्या वह डैनी है डैनी…. एक बार अगर किसी ने उससे कर्जा ले लिया तो उसका छुटकारा मौत के बाद ही मिल सकता है इसलिए अगर उसके कर्ज से मुक्ति चाहिए तो उसे मौत की नींद सुलाना होगा।’

‘अरे यार यह तो बड़ा लफड़े वाला काम है कोई और रास्ता बता ।’ अभिषेक पाल ने पूछा

‘भाई काम लफड़े वाला जरूर है. लेकिन अगर तुमने डैनी और उसकी पूरी फैमिली को खत्म कर दिया तो यह सोच लो वारे न्यारे हो जाएंगे कर्ज से तो मुक्ति मिल ही जाएगी लेकिन उसकी मौत के बाद उसकी इतनी बड़ी प्रॉपर्टी करीबी रिश्तेदार होने के कारण हमारी हो जाएगी और मैं इस प्रॉपर्टी में से कुछ प्रॉपर्टी तुम्हारे नाम कर दूंगा।’

एएसआई कँवल सिंह हत्याकांड का खुलासा करने में अहम भूमिका

बात तो सोनू ने खुंदक में कही थी लेकिन अभिषेक पाल के दिमाग में घर कर गई। उसी दिन उसने फैसला कर लिया कि वह डैनी और उसकी फैमिली को खत्म कर देगा। क्योंकि इससे एक फायदा तो यह है कि उसे कर्ज से मुक्ति मिल जाएगी दूसरे वेद प्रकाश की इतनी बड़ी प्रॉपर्टी में से भी कुछ हिस्सा मिल जाएगा । लेकिन इस काम को कैसे अंजाम दिया जाए । सोचने के लिए उसने जब अपने दिमाग के घोड़े दौडाए तो उसके दिमाग में मन्नू बावला का नाम आया । मनु बावला अभिषेक की छोटी बहन के साथ पढ़ा था । गांव में उसकी छवि एक सिरफिरे युवक की थी जो शराब पीने के बाद कुछ भी कर सकता था। अभिषेक से मन्नू बावला की अच्छी पटती थी । इसलिए वेद प्रकाश की हत्या का विचार आने के बाद एक दिन अभिषेक पाल ने मन्नू बावला को बुलाकर खूब शराब पिलाई और फिर उसे अपने कर्ज की बात बता कर भावुक करते हुए कहा कि उसे वेद प्रकाश से छुटकारा तभी मिल सकता है जब वह उसकी हत्या कर दे। अभिषेक पाल ने बावला से पूछा कि क्या वह उसकी मदद करेगा । तो बावला ने नशे की झोंक में बोल दिया कि ‘भाई तू मेरा बड़ा भाई है तेरे लिए एक क्या 10 कत्ल कर दूंगा।’

मनु बाबला के हां करते ही अभिषेक पाल के दिमाग में वेद प्रकाश से छुटकारा पाने का जुनून सवार हो गया । एक दिन वह अपनी स्विफ्ट गाड़ी से बावला को लेकर हापुड़ गया और वहां अपने एक जानकार से पॉइंट 32 बोर का एक पिस्तौल और चार कारतूस खरीद लाया । ताकि वेद और उसकी फैमिली को मार सके। बावला और अभिषेक पाल ने गांव में कई बार वेद प्रकाश का व  उसके परिवार के दूसरे सदस्यों का अकेले पीछा किया और सोचा कि मौका मिलते ही उसे गोली मार देंगे । लेकिन हर बार उन्हें अपना प्लान यह सोचकर कैंसिल करना पड़ा कि जब गोली की आवाज होगी तो वह पकड़े जा सकते हैं । इसीलिए दोनों ने गोली मारकर वेद प्रकाश से उसके परिजनों की हत्या का इरादा कैंसिल कर दिया और किसी और तरीके पर विचार करने लगे।

इसके बाद उन्होंने प्लान बनाया कि क्यों न उन्हें एक-एक कर किसी बहाने से अपने साथ ले जाकर उनकी हत्या कर दी जाए और उनकी डेड बॉडी कहीं दूसरी जगह ले जाकर फेंक दी जाए । हत्या का यह तरीका उन्हें ज्यादा कारगर लगा जिसमें पकड़े जाने का रिस्क बहुत कम था । लिहाजा उन्होंने अपनी इस योजना पर काम शुरू कर दिया।

14 जुलाई 2016 की दोपहर को अभिषेक पाल अपने दोस्त मन्नू बावला के साथ वेद प्रकाश के घर गया ओर उसे फोन कर के नीचे बुलाया । पाल ने डैनी से कहा ‘अंकल चलो आज आई10 गाड़ी के टायर बदलवा कर लाते हैं । हालांकि वेद प्रकाश के पास अपनी वैगन आर कार थी। मगर जब जमानत के रुप में अभिषेक की गाड़ी उसके पास खड़ी थी । तो क्यों न उसे चलाने लायक बनाया जाए यही सोच कर वेद प्रकाश गाड़ी के टायर बदलवाने के लिए तैयार हो गया और अपने घर के पोर्च में खड़ी अभिषेक की आई 10 कार को निकाला और उसके साथ बख्तावरपुर की तरफ चल दिया। मन्नू बावला गाड़ी में पीछे बैठा था और उसके हाथ में स्कूटर की क्लच का तार था । वजीराबाद गांव से बाहर निकलते ही बावला ने ड्राइविंग सीट की बगल में बैठे वेदप्रकाश के गले में क्लच का तार डालकर पूरी ताकत से खींचा। एक 2 मिनट हाथ पैर फड़फड़ाने और गले से घुटी घुटी चीख निकलने के बीच वेद प्रकाश ने दम तोड़ दिया । जब इत्मीनान हो गया कि वेद प्रकाश की मौत हो चुकी है तो उन्होंने गाड़ी को एक सुनसान जगह रोका और उसके शव को गाड़ी की अगली सीट से उतार कर कार की पिछली सीट पर डिक्की में जहां टायर रखने की जगह होती है वहां फंसा दिया। अभिषेक पाल को पता था कि जिस वक्त वह वेद प्रकाश को अपने साथ ला रहा था वेद प्रकाश के बेटे शुभम ने उन्हें अपने साथ आते हुए देखा था। इसलिए उसने शुभम को ही अगला शिकार बनाने का फैसला किया । वजीराबाद गांव में गली नंबर 8 में ही अभिषेक पाल का एक ओर प्लॉट था जिसमें बाउंड्री वाल थी और वहां उसकी अपनी स्विफ्ट डिजायर गाड़ी खड़ी रहती थी। अभिषेक पाल और मन्नू बावला आई 10 गाड़ी लेकर उसी प्लॉट पर पहुंचे वेद प्रकाश की लाश के समेत उस गाड़ी को वहीं खड़ा कर दिया इसके बाद उन्होंने अपनी स्विफ्ट गाड़ी उठाई और वेद प्रकाश के घर पहुंचे । वहां पहुंचकर उन्होंने फोन करके शुभम को घर के नीचे बुलाया और उससे कहा की आई 10 गाड़ी खराब हो गई है और उसके पापा वेद प्रकाश ने उन्हें घर भेजा है और कहा है कि शुभम को साथ ले आओ। हालांकि शुभम ने चलने से पहले अपने पिता को फोन लगा कर पूछना चाहा कि आखिर बात क्या है । लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ था जिस पर अभिषेक ने बताया कि उनके फोन की बैटरी खत्म हो गई है इसीलिए उन्होंने खुद यहां भेजा है हकीकत से अनजान शुभम अभिषेक पाल के साथ उसकी स्विफ्ट डिजायर गाड़ी में अगली सीट पर बैठ गया और गाड़ी एक बार फिर यमुना पुस्ते की तरफ चल पड़ी ।  मन्नू बावला ने जिस तरह क्लच की वायर से वेद प्रकाश की गला दबाकर हत्या की थी ठीक उसी तरह एक सुनसान जगह पर उसने शुभम की भी हत्या कर दी । हत्या करने के बाद दोनों एक बार फिर गाड़ी लेकर वजीराबाद में अपने खाली प्लॉट पर पहुंचे।

शुभम के शव को भी अभिषेक पाल ने आई 10 गाड़ी में डाल दिया और उसके बाद एक बार फिर वेद प्रकाश के घर पहुंचे। क्योंकि अभिषेक पाल ने देख लिया था कि जब वह शुभम को अपने साथ ले जा रहा था तो उसकी मां साधना छत पर खड़ी यह सब देख रही थी। लिहाजा उन्होंने साधना का भी कत्ल करने का फैसला कर लिया। वेद प्रकाश के घर पहुंचकर उन्होंने वेदप्रकाश की पत्नी साधना से कहा की शुभम आई10 गाड़ी चला रहा था और उसकी गाड़ी से किसी की टक्कर हो गई है जिसमें 1 आदमी घायल हो गया है और पुलिस ने उन्हें थाने में बैठाया हुआ है । जमानत के लिए आपको थाने चलना होगा आप शुभम का आईडी प्रूफ साथ ले लो और हमारे साथ थाने चलो। पाल ने बहाना ऐसा बनाया था की साधना के हाथ पांव फूल गए और बेटे के मोह में वह बिना सोचे समझे अभिषेक पाल की गाड़ी में बैठ गई एक बार फिर वही हुआ। दोनों गाड़ी को यमुना पुश्ता रोड पर ले गए और एक सुनसान जगह पड़ते ही साधना की भी क्लच की वायर से गला दबाकर हत्या कर दी । इसके बाद अभिषेक और बावला एक बार फिर वजीराबाद में अपने गली नंबर 8 के प्लॉट पर पहुंचे और साधना के शव को भी आई 10 गाड़ी में डाल दिया बस अब घर में वेद प्रकाश की बेटी नैना बची थी जो शाम होते-होते स्कूल की नौकरी से वापस घर पहुंच चुकी थी । अभिषेक पाल ने सोचा कि क्यों काम अधूरा छोड़ा जाए। लगे हाथों अगर लड़की को भी मार दिया जाए तो घर में न तो कोई पैरवी करने वाला रहेगा, न ही संपत्ति का कोई वारिस रहेगा इसलिए बावला को लेकर अभिषेक पाल फिर एक बार वेद प्रकाश के घर पहुंचा। वहां उसने नैना को बुलाकर कहा कि उसके भाई की गाड़ी से किसी का एक्सीडेंट हो गया था । तुम्हारे मम्मी पापा और भाई सब थाने में हैं, क्योंकि वहां अभी थोड़ा वक्त लगेगा इसलिए तुम्हारे पापा ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है ताकि तुम भी थाने चलो और उनके पास रहो। नैना को परिवार की चिंता हो गई उसने झटपट घर का ताला बंद किया और उसके बाद अभिषेक पाल के साथ उसकी स्विफ्ट गाड़ी में बैठ कर खजूरी थाने की तरफ चल पड़ी। लेकिन एक बार फिर यमुना पुस्ता पर एक सुनसान जगह पहुंचते ही पीछे की सीट पर बैठे मन्नू चावला ने क्लच की वायर से नैना की गर्दन में वायर डाल कर उसकी हत्या कर दी इसके बाद उसके शव को भी वे अपने खाली प्लॉट पर ले आए। नैना की लाश को भी उन्होंने उसी गाड़ी में भर दिया जिसमें उसके माता पिता और भाई की लाश भरी हुई थी।

इस दौरान अभिषेक पाल ने एक काम किया कि जिस सदस्य की हत्या की उनके मोबाइल स्विच ऑफ करके उसका सिम कार्ड निकालकर तोड़ कर फेंक दिया अभिषेक पाल ने नैना के पास में पड़ी घर की चाबी अपने कब्जे में ले ली चुकी उस दिन रात बहुत हो चुकी थी इसलिए उस दिन मन्नू बावला और अभिषेक दोनों अपने घर चले गए। अगले दिन उन्होंने रितेश को अपने पास बुलाया और उसे वेद प्रकाश ने उसके परिवार के सदस्यों की हत्या करने की बात बताइ और उसे वेद प्रकाश के घर की चाबी सौंप कर कहा कि वह घर का ताला खोल कर वहां से वेद प्रकाश की सैंटरो गाड़ी की चाबी लेकर उसकी सेंट्रो कार उनके पास ले आए। रितेश कटियार ने अगले दिन यानी 15 जुलाई को ऐसा ही किया। प्रकाश के घर का ताला खोलकर उसने सैंटरो कार की चाबी ढूंढी घर का ताला लगाया और फिर पोर्च में खड़ी वेद प्रकाश की सेंट्रो कार वहां से निकालकर गली नंबर 8 में अभिषेक पाल के प्लॉट पर पहुंचा दी। दर असल वेद प्रकाश की गाड़ी लाने का मकसद यह था पुलिस की गाड़ी के शीशे काले थे । 15 तारीख की रात को अभिषेक पाल और मनु ने आई10 गाड़ी में रखें वेद प्रकाश व उनके परिजनों के शव सैंटरो गाड़ी में भर दिए। संयोग से उसी रात दिल्ली और एनसीआर में भारी बारिश होने लगी जिससे अभिषेक पाल को चारों लाशों को ठिकाने लगाने में मदद मिल गई 16 जुलाई की सुबह 3 बजे अभिषेक पाल और मनु बावला चारों शवों के साथ सैंटरो लेकर दिल्ली से निकले गाजियाबाद होते हुए मसूरी गंग नहर पर पहुंचे जहां धौलाना जाने वाले रास्ते पर आगे बढ़ते हुए सुबह करीब 5 बजे उन्होंने सैंटरो गाड़ी समेत सभी लाशों को गंग नहर में बहाने का फैसला किया लेकिन बारिश के कारण नहर के किनारे रेत काफी जमीन में धंस रहा था नहर की तरफ बढ़ाते ही सैंटरो कार के पहिए रेत में फंस गए। इस कारण अभिषेक और बावला ने एक एक करके वेद प्रकाश उनकी पत्नी साधना और बेटे शुभम  के शव गंग नहर में फेक दिए। तीनों के शव गंग नहर में उछाल कर दूर फेकने के प्रयास में अभिषेक और बावला काफी थक गए थे इसलिए जब उन्होंने नैना की लाश को नहर में फेका तो वह दूर तक नही गई और कुछ देर बाद लहरों के सहारे किनारे आ लगी। चारों शवों को नहर में फेंककर और रेत में फंसी सैंट्रो को वहीं छोड़कर अभिषेक और मन्नू बावला पैदल मसूरी रोड पर आए और सुबह ही सुबह बस पकड़कर दिल्ली वापस आ गए।

दिल्ली आकर उन्होंने जब सोनू को बताया कि उन्होंने वेद प्रकाश के पूरे परिवार की हत्या कर शव ठिकाने लगा दिए है तो वह सहम गया। उसने अपने परिवार में भी किसी को ये बात नहीं बताई। इसके कुछ दिन बाद जब धौलाना पुलिस ने नैना का शव बरामद किया और बाकी सदस्यों का शव नहीं मिलने के कारण उन्हें ऑनर किलिंग मामले में परिजनों को ही तलाश करने लगी तो भी सोनू ने यह बात किसी पर उजागर नहीं की।

कुछ समय बाद रितेश जब कन्नौज में अपने घर गया था तो पारिवारिक कलह के कारण उसने जहर खाकर खुदकुशी कर ली।

इधर, कुछ समय बाद रामकिशन ने वेदप्रकाश के परिवार के लापता होने पर उनके घर व दूसरी संपत्तियों की देखभाल शुरू कर दी। इधर जब अभिषेक जब भी सोनू से कहता कि अपने चाचा की प्रॉपर्टी बेचकर उसे कुछ पैसा दो तो वह कह देता की अगर उसने अभी ऐसा कोई प्रयास किया तो पुलिस को उन पर शक हो जाएगा। इसलिए धीरे-धीरे वक़्त गुजरता चला गया। और इसी बीच सितंबर 2018 में मन्नू बावला की एक सड़क दुर्घटना में अपने दो दोस्तों के साथ मौत हो गई। बस उसकी मौत के बाद ही वेद प्रकाश के परिवार की हत्या का राज खुलने लगा। और यह बात क्राइम ब्रांच के नारकोटिक्स दस्ते तक पहुँच गई और अभिषेक पाल पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

अभिषेक पाल से पूछताछ के बाद इंस्पेक्टर सुनील जैन ने अभिषेक पाल को अदालत में पेश कर दिया जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इसके बाद क्राइम ब्रांच ने धौलाना पुलिस को अभिषेक पाल की गिरफ्तारी और उसके द्वारा किये गए चौहरे हत्यकांड के खुलासे की जानकारी दी। चूंकि दिल्ली में न तो वेदप्रकाश के परिवार की गुमशदगी दर्ज थी न ही नैना हत्याकांड की जांच दिल्ली पुलिस कर रही थी इसलिए क्राइम ब्रांच ने अभिषेक पाल के बारे में सूचना देकर अपना काम पूरा कर लिया।

अभिषेक पाल की गिरफ्तारी और वेदप्रकाश परिवार के चौहरे हत्याकांड की जानकारी मिलने के बाद धौलाना थाने के वर्तमान प्रभारी  एच के सक्सेना ने जुलाई 2016 में अपराध संख्या 279 पर दर्ज नैना हत्याकांड की फाइल दोबारा खुलवाई और अभिषेक पाल के बयान के आधार पर इस केस को दोबारा खोलने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दिया । अदालत के आदेश के बाद अब धौलाना पुलिस अभिषेक पाल को तिहाड़ जेल से अपनी कस्टडी में लेकर रिमांड पर लेने की तैयारी में जुटी है। हो सकता है अभिषेक पाल से पूछताछ के बाद इस मामले में कुछ और लोगों की गिरफ्तारी भी संभव हो।

(कथा अभियुक्त से हुई पूछताछ और पुलिस जांच पर आधारित)

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