शहीद भगत सिंह के गुप्त ठिकानों को यादगार का दर्जा दे सरकार

शहीद भगत सिंह के गुप्त ठिकानों को यादगार का दर्जा दे सरकार

फिरोजपुर स्थित तूड़ी बाजार में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के गुप्त ठिकानों को यादगार व लाइब्रेरी में तबदील करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर पंजाब स्टूडैंट्स यूनियन ने बुधवार को मिनी सचिवालय समक्ष धरना प्रदर्शन किया। धरने उपरांत प्रशासन को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। धरने दौरान यूनियन के जिला कन्वीनर धीरज कुमार व सुखमंदर कौर ने कहा कि देश के हालात दिन-प्रतिदिन बदतर होते जा रहे हैं। शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।

शिक्षित युवाओं को भी कहीं रोजगार नहीं मिल रहा। किसान खुदकुशियां करने को मजबूर हैं। अध्यापकों के वेतन रुके पड़े हैं। वक्ताओं ने मांग उठाई कि फिरोजपुर स्थित तूड़ी बाजार में शहीद भगत सिंह के गुप्त ठिकानों को यादगार का दर्जा देकर इसे लाइब्रेरी या म्यूजियिम में तबदील किया जाए। लड़कियों की समूची शिक्षा मुफ्त की जाए। सालाना अढ़ाई लाख से कम आमदन वाले सभी वर्गों के विद्याॢथयों की समूची विद्या भी माफ  हो। दलित विद्याॢथयों की फीस माफी के लिए अढ़ाई लाख आमदन वाली शर्त को हटाया जाए। री-अपीयर व पुनर्मूल्यांकन की फीस माफ की जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार चुनाव के समय तो काफी वायदे कर सत्ता में आ गई, मगर अब वायदों से भाग रही है।

पंजाब स्टूडैंट्स यूनियन ने आज यहां के डिप्टी कमिश्नर दफ्तर समक्ष धरना लगाकर शहीद भगत सिंह व उसके साथियों के तूड़ी बाजार फिरोजपुर में स्थित गुप्त ठिकाने को अजायब घर के तौर पर विकसित करने की मांग की। पी.एस.यू. की जोनल प्रधान हरदीप कौर कोटला ने कहा कि शहीदों का ठिकाना गिरने की कगार पर है परंतु सरकार ने इसे संभालने के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं किया। विद्यार्थी नेता रवि ढिल्लवां व जगदीप सिंह ने बताया कि इंजी. राकेश कुमार ने वर्ष 2014 में शहीदों के इस ठिकाने की तलाश की थी।

फिरोजपुर के तूड़ी बाजार की इमारत जो 90 वर्ष पुरानी है परंतु पंजाब सरकार ने चुनाव दौरान भरोसा देने के बावजूद इस स्थान को यादगार के तौर पर विकसित करने की कोई कोशिश नहीं की। इस इमारत में क्रांतिकारियों ने आजादी की लड़ाई के लिए अहम मीटिंगें कीं व इसे गुप्त ठिकाने के तौर पर प्रयोग किया। विद्यार्थी नेता केशव आजाद, साहिल, बलजीत सिंह, रिया व राजप्रीत सिंह ने कहा कि इस इमारत को शहीदों की विरासत के तौर पर संभाला जाना चाहिए ताकि नौजवान पीढ़ी को शहीदों के इतिहास बारेजानकारी मिल सके। पी.एस.यू. ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगें न मानी गईं तो संघर्ष और तेज किया जाएगा।

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